Sad

My Sad Shayari in Hindi for Life

चारों तरफ़ है आदमी आपस में वो अंजान है
घर से निकल के क्या करें बाहर समाँ वीरान है
क़ुदरत ख़ुदा की बैठी आँसू बहा रही है
लूटा है इसको जिसने वो भी यही इन्सान है।

दिल है उदास और इन आँखों में नमी क्यों
ख़ुद में है कमी ढूँढते औरों में कमी क्यों
क्यों ज़ोर इस दिमाग़ पर देकर हो सोचते
औरों के लिए आसमाँ मुझको ये ग़मी क्यों?

एक रोज़ ख़ुशी का आलम था आबाद हमारी दुनियाँ थी
और आज उसी दुनियाँ को हम आँसू में बहाये जाते हैं
हमदम भी मिला हमसफ़र बना दामन में हमारे ख़ुशियाँ थी
और आज उन्ही ख़ुशियों को हम एक क़फ़न उढाये जाते हैं।